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भारत सरकार के जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं को नियमित स्थाई एवं व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की व्यवस्था ही सिविल रजिस्ट्रेशन प्रणाली है।
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केन्द्रीय अधिनियम, जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 एवं राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2000 के प्रावधानों के तहत जन्म और मृत्यु की घटनाओं का रजिस्ट्रीकरण (पंजीयन) किया जा रहा है।
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सामान्यत: किसी जन्म अथवा मृत्यु की घटना को दर्ज कराने के लिये 21 दिन का समय निर्धारित है।
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सामान्य अवधि 21 दिन के भीतर-भीतर जन्म/मृत्यु की घटनाओं को दर्ज कराने पर कोई फीस/शुल्क देय नहीं है।
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• किसी घटना का पंजीयन सामान्य अवधि 21 दिन में नही हुआ है तो भी ऐसी घटना को जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 में वर्णित प्रावधान व प्रक्रिया को अपनाते हुए विलम्ब शुल्क देकर पंजीयन कराया जा सकता है।
• 21 दिन से अधिक और 30 दिवस तक रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) रूपये 1/- विलम्ब शुल्क पर पंजीकरण कर सकता है।
• 30 दिवस से अधिक किन्तु 1 वर्ष तक उपजिला रजिस्ट्रार (विकास अधिकारी पंचायत समिति) अथवा जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), (जिला मुख्यालय पर आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग का उप/सहायक निदेशक), की लिखित अनुज्ञा पर रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) रूपये 1/- विलम्ब शुल्क पर घटना का पंजीकरण करेगा।
• घटना के 1 वर्ष से अधिक अवधि पश्चात् कार्यपालक मजिस्ट्रेट की लिखित अनुज्ञा पर रूपये 1/- विलम्ब शुल्क पर घटना का पंजीकरण कराया जा सकता है।
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जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 के प्रावधानों के तहत जन्म/मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
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• यदि जन्म या मृत्यु की घटना घर पर होती है तो उस परिवार का मुखिया या मुखिया की अनुपस्थिति में कोई निकटतम सम्बन्धी स्थानीय रजिस्ट्रार को सूचना देने के लिए उत्तरदायी होगा।
• यदि जन्म या मृत्यु की घटना अस्पताल, पुलिस स्टेशन, होटल, धर्मशाला एवं जेल में होती है तो सूचना देने के लिए उस संस्था का प्रभारी अधिकारी उत्तरदायी होगा।
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• जन्म/मृत्यु की घटना का पंजीकरण जहां घटना घटित हुई है उस क्षेत्र के रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के यहां पंजीकरण कराना होगा। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 7 के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक स्थानीय क्षेत्र के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिये अलग-अलग रजिस्ट्रार नियुक्त किये गये है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए ग्राम पंचायत के ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव एवं शहरी क्षेत्रो के लिए नगर निकाय स्तर पर रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के यहां जन्म अथवा मृत्यु की घटना का पंजीयन कराया जा सकता है।
• राज्य के सभी राजकीय चिकित्सालयों/सीएचसी/पीएचसी को 'पहचान' पोर्टल से जोडकर उपरजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है, जो उनके परिसर में होने वाले जन्म अथवा मृत्यु की घटना का 21 दिवस मे ऑनलाईन पंजीयन करने के लिए उत्तरदायी है।
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जी, हां, राज्य में निजी चिकित्सालयों को भी 'पहचान' पोर्टल से जोडकर उनके परिसर में होने वाली जन्म या मृत्यु की घटना का सीधे ही आवेदन करने की सुविधा प्रदान की गई है।
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पंजीयन पश्चात् घटना का पंजीकरण जिस रजिस्ट्रार के यहॉ कराया गया है, प्रमाण पत्र वहीं से प्राप्त होगा।
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जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रथम प्रति नि:शुल्क एवं अतिरिक्त जितनी भी प्रतियों की आवश्यकता है, राज्य नियम के अन्तर्गत शुल्क जमा कर प्राप्त की जा सकती है।
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जी हॉ, बच्चे का बिना नाम का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है। बच्चे के माता-पिता या संरक्षक द्वारा रजिस्ट्रार को लिखित या मौखिक इत्तिला देने पर जन्म के रजिस्ट्रीकरण की दिनांक से 1 वर्ष तक नि:शुल्क एवं उसके पश्चात् 15 वर्ष की अवधि के भीतर रूपये 5/- का शुल्क देकर नाम जुड़वाया जा सकता है एवं नया प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है, 15 वर्ष के पश्चात् नाम जुड़वाने का अधिनियम में प्रावधान नहीं है।
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जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना बच्चे का प्रथम अधिकार है एवं यह उसकी पहचान इंगित करता है । जन्म प्रमाण पत्र के निम्न लिखित लाभ/उपयोग है :- - विद्यालय में प्रवेश
- रोजगार पाने हेतु आयु का प्रमाण
- विवाह हेतु आयु का प्रमाण
- अभिभावक की पहचान
- मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु
- पासपोर्ट पाने हेतु
- राशन कार्ड में नाम दर्ज करवने हेतु
- ड्राईविंग लाईसेन्स बनवाने हेतु
- बीमा पॉलिसी प्राप्त करने हेतु
- आधार कार्ड बनवाने हेतु
- भामाशाह कार्ड में नाम जुडवाने हेतु
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• सम्पत्ति के उत्तराधिकार हेतु
• पेंशन-बीमा के मामले निपटाने हेतु
• सम्पत्ति दावो को निपटाने के हेतु
• भूमि रूपान्तरण के लिये
• सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये
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जन्म और मृत्यु के रजिस्टर में प्रविष्टि में संशोधन के लिये नियम बनाये गये है, नियमों में दिये गये प्रावधानों के अनुसार रजिस्ट्रार प्राप्त साक्ष्यों एवं रजिस्ट्रार द्वारा स्वयं संतुष्ट होने पर नियमानुसार प्रविष्टी में शुद्धिकरण/निरस्तीकरण किया जा सकता है।
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रजिस्ट्रार के रजिस्टर में या प्रमाण पत्र में शुद्धिकरण/निरस्तीकरण हेतु कोई शुल्क देय नही है।
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जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 20(2)-॥ के तहत ऐसे बालक जिसका जन्म भारत के बाहर हुआ है एवं उसके माता-पिता बालक के जन्म का भारत में रजिस्ट्रीकरण कराना चाहते है और इस इरादे से आए हो कि उन्हें अब भारत में ही रहना है तो वे भारत आने कि तिथि से 60 दिन के अन्दर जन्म का रजिस्ट्रीकरण करवा सकते है, यदि 60 दिन में रजिस्ट्रीकरण नहीं करवाया गया है तो विलम्ब से पंजीयन की सामान्य प्रक्रिया एवं प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जाकर रजिस्ट्रीकरण करवाया जा सकेगा।
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आमजन की सुविधा एवं सूचनाओं के नियमित संकलन को दृष्टिगत रखते हुये जन्म-मृत्यु पंजीकरण हेतु वेबपोर्टल 'पहचान' (http//:Pehchan.raj.nic.in) पर रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जन्म एवं मृत्यु का ऑनलाईन पंजीकरण कर कंप्यूट्रीकृत जन्म/मृत्यु/मृतजन्म/विवाह प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे है।
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• 'पहचान' वेबपोर्टल पर जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन के ऑनलाईन प्रपत्र भरने की सुविधा
• आवेदन पत्र की स्थिति की जानकारी उपलब्ध
• दोहरे रजिस्ट्रेशन पर रोक की व्यवस्था
• सहायता हेतु टोल फ्री नम्बर की सुविधा
• प्रमाण पत्र में त्रुटि होने की कम सम्भावना
• प्रमाण पत्र की अतिरिक्त प्रतियां प्राप्त करने में समय व श्रम की बचत
• डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सुविधा
• आवेदक को रजिस्ट्रेशन की सूचना SMS से
• आवेदक को ई-मेल से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है
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• 'पहचान' वेबपोर्टल पर जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन के ऑनलाईन प्रपत्र भरने की सुविधा
• ई-मित्र के माध्यम से तथा स्वयं भी 'पहचान' वेबपोर्टल पर आवेदन कर सकते है।
• मोवाईल ऐप द्वारा भी आवेदन किया जा सकता है।
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आवेदक ई-मित्र केन्द्र पर वेबपोर्टल 'पहचान' पर आवेदन पत्र पूर्ण करायेगा एवं ई-मित्र संचालक द्वारा सम्बन्धित दस्तावेज अपलोड कर सम्बन्धित रजिस्ट्रार को भेजा जावेगा।
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ई-मित्र के माध्यम से पंजीकरण कराने हेतु आवेदक को जन्म/मृत्यु की पुष्टि हेतु स्थानीय पार्षद/राजकीय कर्मचारी/आंगनबाडी कार्यकर्ता का प्रमाण पत्र या संस्थागत जन्म/मृत्यु की दशा में अस्पताल का डिस्चार्ज टिकट/पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति तथा आवेदक की स्वयं की पहचान का दस्तावेज देना होगा। यदि घटना विलम्ब से पंजीकरण की जा रही है तो आवश्यक शपथ पत्र एवं सम्बन्धित अनुज्ञा आवेदन के साथ अपलोड की जावेगी।
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• जी हां, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क देय होगा जो इस प्रकार है:-
• आवेदन प्रपत्र के साथ संलग्न पहचान/पते के दस्तावेज का राजकीय डाटाबेस से सत्यापन किये जाने की स्थिति में 10/- रुपये।
• आवेदन प्रपत्र के साथ संलग्न पहचान/पते के दस्तावेज को स्केन कर अपलोड किये जाने की स्थिति में 20/- रुपये।
• 30 दिन पश्चात की विलम्बित घटना के लिए प्रस्तुत शपथ पत्र को स्केन कर अपलोड किये जाने की स्थिति में 30/- रूपये।
• पूर्व मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी पर प्रमाण पत्र प्रिन्ट हेतु 10/- रूपये।
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जी हां, जिस ई-मित्र केन्द्र के माध्यम से आवेदन किया गया है उस ई-मित्र केन्द्र से डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
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'पहचान' वेबपोर्टल के माध्यम से जारी किये जाने वाले ऑनलाईन प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रार के द्वारा अपने डिजिटल हस्ताक्षर एवं ई-साईन किये जाकर प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है।
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आमजन की सुविधा के लिए आवेदन करने, आवेदन का स्टेटस देखने, रजिस्ट्रारों से सम्बन्धित सम्पर्क सूत्र जानने एवं पंजीयन पश्चात् प्रमाण पत्र ई-मेल पर प्राप्त करने हेतु 'पहचान' वेबपोर्टल का 'मोबाईल ऐप' भी प्रारम्भ कर दिया गया है, जो एन्ड्रॉयड फोन पर गूगल प्ले स्टोर में जाकर डाउनलोड किया जा सकता है।
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हां, सम्बन्धित रजिस्ट्रार के पास जाकर पुन: आवेदन कर कम्प्यूट्रीकृत प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
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अधिनियम नाम के परिवर्तन की अनुमति प्रदान नहीं करता है किन्तु विशेष परिस्थितियों में रजिस्ट्रार द्वारा साक्ष्यों एवं तथ्यों की संतुष्टि बाद जिला रजिस्ट्रार की अनुमति से ऊर्फ लगाकर प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है ।
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जन्म दिनांक में परिवर्तन का अधिनियम में प्रावधान नही है। अधिनियम जन्म दिनांक में परिवर्तन की अनुमति प्रदान नही करता है।
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हां न्यायालय द्वारा गोद प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरान्त बच्चे के माता-पिता के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है अथवा नये माता-पिता के नाम से अधिनियम के प्रावधानों एवं प्रक्रिया अनुसार जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
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• विवाह का पंजीयन जहां विवाह सम्पन्न हुआ है, उससे सम्बन्धित क्षेत्र के रजिस्ट्रार के पास (ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत/शहरी क्षेत्र में नगर पालिका, नगर परिषद/नगर निगम) जाकर विवाह का पंजीयन करवाया जा सकता है।
अथवा
• विवाह का पंजीयन उस रजिस्ट्रार द्वारा भी किया जा सकता है, जहां पर वर-वधू आवेदन करने की दिनांक से कम से कम 30 दिवस पूर्व निवास कर रहे हो।
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राजस्थान में विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण नियम, 2009 के तह्त किया जा रहा है।
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हां यदि प्रार्थी चाहे तो पुराने विवाहों का पंजीकरण करवाकर प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
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हां विवाह पंजीकरण हेतु वर-वधू की उपस्थिति रजिस्ट्रार के समक्ष होना आवश्यक है।
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• विवाह पंजीकरण हेतु आवेदन पत्र
• दो गवाहों के शपथ पत्र नोटेरी से सत्यापित
• वर-वधू का शपथ पत्र
• वर-वधू का भूण हत्या न करने का शपथ पत्र
• वर-वधू का आयु प्रमाण पत्र
• वर-वधू एवं गवाहों के पहचान (आई.डी.) एवं पते के दस्तावेज
• वर-वधू की पासपोर्ट साईज दो-दो फोटो एवं 5 X 3 सेमी की संयुक्त फोटो
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विवाह हेतु वर की आयु 21 वर्ष एवं वधू की 18 वर्ष होना आवश्यक है।
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विवाह के पक्षकारों के नाबालिग होने की दशा में पंजीयन पर रोक नही है, किन्तु यदि वर या वधू या उनमे से कोई एक शादी के समय नाबालिग हो तो विवाह पंजीयन अधिकारी पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने एवं संतुष्टि होने के पश्चात विवाह का पंजीयन कर सकेगा लेकिन साथ ही ऐसे पक्षकारों के मात-पिता/संरक्षक एवं अन्य के विरूद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत वांछित कार्यवाही करने हेतु जिला विवाह पंजीयन अधिकारी (जिला कलक्टर) को सूचित करेगा।
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राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 राजस्थान राज्य में सम्पन्न हुऐ विवाहों पर ही लागू होता है।
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जी हां, परंतु इसके लिए आवश्यक है कि मृतक पक्षकार के माता-पिता अथवा संरक्षक की ओर से विवाह निष्पादन के सम्बन्ध में शपथ पत्र प्रस्तुत किये जावें एवं विवाह पंजीयन के समय रजिस्ट्रार के सम्मुख उपस्थित रहें।
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हां, विवाह पंजीकरण हेतु 10/- रूपये फीस का प्रावधान है किन्तु 30 दिवस की अवधि व्यतीत होने के उपरान्त 100/- रूपये फीस जमा की जाती है।
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जी, हां, 'पहचान' पोर्टल के माध्यम से जारी होने वाले जन्म-मृत्यु अथवा विवाह के प्रमाण पत्र डिज़िटली साईन अथवा ई-साईन होने के पश्चात् राजस्थान सरकार द्वारा तैयार किये गये राज ई-वॉल्ट के लॉकर में सुरक्षित रखे जाते है एवं प्रमाण पत्र की प्रति सम्बन्धित को ई-मेल पर भेजी जाती है।
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हॉं, पति/पत्नि का नाम दर्ज किया जा सकता है।
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भारत में मृत्यु का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा जिस देश में मृत्यु हुयी है उस देश की ऐमबेसी द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा।
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- घर पर जन्म होने की स्थिति में उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
- राजकीय अस्पताल में जन्म होने पर सम्बन्धित अस्पताल का प्रभारी अधिकारी (उप रजिस्ट्रार)।
- निजी अस्पताल में जन्म होने कि स्थिति में जिस क्षेत्र में निजी अस्पताल स्थित है उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
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जन्म के 30 दिवस से 1 वर्ष के भीतर ग्रामीण क्षेत्र मे सम्बंधित क्षेत्र के ब्लॉक नोडल अधिकारी (जन्म-मृत्यु) एवं शहरी क्षेत्र में जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के द्वारा जारी की जाती हैं जन्म के 1 वर्ष के पश्चात ग्रामीण/शहरी क्षेत्र मे सम्बंधित क्षेत्र के कार्यपालक मजिस्ट्रेट (जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार) के द्वारा जारी की जाती हैं।
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- आवेदक के स्वयं द्वारा प्रस्तुत दो प्रति में शपथ पत्र के साथ फोटो।
- आवेदक की एक पहचान सम्बन्धी दस्तावेज (आधार कार्ड, पहचान पत्र, लाइसेंन्स व अन्य दस्तावेज) ।
- माता-पिता का आधार कार्ड तथा आधार कार्ड नही होने की स्थिति में अन्य पहचान सम्बन्धी दस्तावेज आवश्यक है।
- गवाहों के शपथ पत्र व उनकी पहचान सम्बन्धी दस्तावेज।
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जन्म प्रमाण पत्र हिन्दी भाषा में होने पर हिन्दी भाषा (मंगल फोन्ट) में, अग्रेजी भाषा में होने पर अग्रेजी भाषा में तथा हिन्दी/अग्रेजी दोनो भाषा में होने पर दोनो भाषा में दर्ज करें।
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सामान्यतः विवाहित माता-पिता के बच्चे का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, उसी प्रक्रिया के आधार पर किया जावेगा केवल बच्चे के प्रमाण पत्र में पिता/माता का नाम रिक्त रखा जावेगा
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जन्म प्रमाण पत्र जहाँ से जारी किया गया है वहाँ के संबंधित रजिस्ट्रार से संपर्क करके माता-पिता का आधार जुड़वाया जा सकता है।
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जन्म प्रमाण पत्र मे बच्चे का नाम जुडवाने हेतु आवेदन पत्र के साथ जन्म प्रमाण पत्र, माता/पिता का आधार और जनाधार कार्ड की आवश्यकता होती है।
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जन्म प्रमाण पत्र में बच्चे के नाम में उपनाम (सरनेम) शपथ पत्र एवं दस्तावेजों के आधार पर जुडवा सकते हैं।
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जन्म प्रमाण पत्र में पहचान पोर्टल के माध्यम से एक वर्ष तक निःशुल्क बच्चे का नाम जोड़ने हेतु प्रार्थी स्वयं आमजन विकल्प या ई-मित्र से रजिस्ट्रार को आवेदन करके नाम जुड़वा सकते है।
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जुड़वाँ बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के लिये पहचान पोर्टल पर आवेदन प्रथम बच्चे के लिए सामान्य प्रक्रिया से करें एवं दूसरे बच्चे का जुडवाँ के विकल्प पर क्लिक कर इन्द्राज करें।
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पंजीकरण का इंद्राज हिन्दी अथवा अंग्रेजी या दोनो भाषाओं में किया जा सकता है। किसी भी एक भाषा में पूरा इंद्राज करना आवश्यक है। किसी भी एक भाषा में इंद्राज पंजीकरण में दूसरी भाषा जोड़ने का विकल्प पोर्टल पर पृथक से उपलब्ध है।
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प्रमाण पत्र प्रिंट करने से पहले रजिस्ट्रार, पंजीकरण को स्वतः ही संशोधन कर सकता है। पंजीकरण को एक बार प्रिंट करने के पश्चात उसमें परिवर्तन नही किया जा सकता है। ऐसी स्थिति मे रजिस्ट्रार संशोधन की रिक्वेस्ट भेज सकता है। जिले में पदस्थापित जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु ) एवं संयुक्त निदेशक / उप निदेशक, सांख्यिकी विभाग के द्वारा रिक्वेस्ट स्वीकृत होने के पश्चात रजिस्ट्रार उस पंजीकरण में संशोधन कर सकते हैं व उप रजिस्ट्रार द्वारा केवल प्रमाण पत्र का इंद्राज किया जा सकता है एवं प्रिंट करने से पहले संशोधन किये जा सकते है। प्रिंट करने के पश्चात उप रजिस्ट्रार के संशोधन की रिक्वेस्ट उसके रजिस्ट्रार द्वारा भेजी जा सकती है।
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उप रजिस्ट्रार जन्म दिनांक से 21 दिवस तक जन्म प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।
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साइन PDF को Adobe Reader मे खोलें। ई-साइन/डिजिटल साइन पर Right Click करें। फिर Signature Validate कर,Trust में जाकर सभी विकल्प को Check करें। PDF को बंद कर दुबारा खोले। इस प्रक्रिया को सिस्टम पर एक साइन के लिए केवल एक बार ही करना है।
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प्रश्नवाचक चिन्ह पर Right Click करके Validate Signature करना चाहिए।
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जन्म प्रमाण पत्र जिस रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी किया गया है वहा के रजिस्ट्रार को आवेदन करके नाम जुड़वाया जा सकता है।
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जुड़वाँ बच्चे का जन्म होने पर पहचान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते समय जुड़वाँ विकल्प से रजिस्ट्रेशन ना करके पृथक-पृथक कर दिया जाता है ऐसी स्थिति में जिला रजिस्ट्रार की लोगिन आई डी पर जुड़वाँ बनाने का विकल्प प्रदान किया गया है। ऐसे स्थिति में दोनो रजिस्ट्रेशन को जुड़वाँ कर दिया जाता है। जिससे जन्म प्रमाण पत्र में संशोधन किया जा सकता है।
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यदि पंजीयन के समय मोबाईल नम्बर नही दिए गये है तो रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में मोबाईल नम्बर अपडेट करवायें।
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साइन करवायें।
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हाँ, राजस्थान राज्य के निवासियों के लिए जन आधार कार्ड आवश्यक है। विशेष परिस्थिति में जनाधार कार्ड में छूट का प्रावधान है।
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परिवार का जनआधार नामाकंन करवाकर आवेदन करें।
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राजस्थान सरकार की सरकारी मुद्रणालय से गजट नोटिफिकेशन करवाये जाने के पश्चात नोटिफिकेशन की प्रति एवं पुराना मूल प्रमाण पत्र रजिस्ट्रार को प्रस्तुत करके नाम परिवर्तन करवाया जा सकता है।
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार कार्यालय से अथवा पहचान पोर्टल पर प्रमाण पत्र में मोबाईल न. पर प्राप्त OTP से डाउनलोड करके प्राप्त किया जा सकता है।
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निजी अस्पताल के क्षेत्र में लगने वाले रजिस्ट्रार से जन्म पंजीयन करवा कर प्राप्त करें। पंजीकृत होने पर पहचान पोर्टल के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है।
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सम्बन्धित निजी अस्पताल के क्षेत्र में लगने वाले रजिस्ट्रार के द्वारा संशोधन किया जाता है।
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जन्म/मृत्यु दिनांक से 30 दिवस के भीतर जन्म/मृत्यु का पंजीयन नही होने पर अनुज्ञा/शपथ पत्र की आवश्यकता होती हैं।
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यदि पंजीयन के समय मोबाईल नम्बर नही दिया गया है तो रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में मोबाईल नम्बर अपडेट करवायें।
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- घर पर मृत्यु होने की स्थिति में उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
- राजकीय अस्पताल में मृत्यु होने पर सम्बन्धित अस्पताल का प्रभारी अधिकारी (उप रजिस्ट्रार)।
- निजी अस्पताल में मृत्यु होने कि स्थिति में जिस क्षेत्र में निजी अस्पताल स्थित है उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
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मृतक का नाम, मृत्यु दिनांक, मृतक के माता-पिता का नाम एवं विवाहित होने कि स्थिति में मृतक की पत्नी का नाम आदि सूचनाओं का विशेष ध्यान रखकर ही मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम दर्ज करवाना चाहिए।
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मृतक के दो भिन्न-भिन्न नाम होने पर वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर मूल/प्रथम नाम के बाद उर्फ लगाकर द्वितीय नाम के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।
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हाँ, सम्बधित रजिस्ट्रार द्वारा जिला रजिस्ट्रार के अनुमोदन पश्चात आवेदन के समय प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र में लिपिकीय त्रुटि का शुद्विकरण किया जा सकता है ।
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सामान्यतया 7 वर्ष तक किसी व्यक्ति के बारे में कुछ भी पता नही चले एवं सक्षम न्यायालय/प्राधिकारी के मृतक घोषित करने पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।
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दुर्घटना में यदि दुर्घटना स्थल पर ही मृत्यु हो जाती है तो दुर्घटना स्थल क्षेत्र में लगने वाले जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जाता है। दुर्घटना स्थल से अस्पताल में ले जाने पर यदि मृत्यु सरकारी अस्पताल में होती है तो उसी सरकारी अस्पताल के उप रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जायेगा व मृत्यु निजी अस्पताल में होने पर उस क्षेत्र में लगने वाले नगर निगम/नगर परिषद/नगरपालिका/गाम पंचायत द्वारा जारी किया जायेगा।
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नही, करवाया जा सकता है। क्योंकि जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के नियमानुसार घटना जिस क्षेत्र में घटित हुई है उस क्षेत्र के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के द्वारा पंजीयन किया जावेगा।
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- आवेदक का स्वयं द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र (दो प्रति) के साथ स्वयं की फोटो।
- आवेदक की एक पहचान सम्बन्धी दस्तावेज (आधार कार्ड, पहचान पत्र, लाइसेंन्स व अन्य दस्तावेज) ।
- मृतक का आधार कार्ड नही होने की स्थिति में अन्य पहचान सम्बन्धी दस्तावेज आवश्यक है।
- गवाहों के शपथ पत्र व उनकी पहचान सम्बन्धी दस्तावेज।
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मृतक राजस्थान राज्य का एवं बाहरी राज्य का नागरिक होने पर जन आधार कार्ड की शिथिलता प्रदान कर मृत्यु की घटना का पंजीयन किया जाता है।
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार से मृत्य प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साईन करवाये।
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विशेष परिस्थतियों में मृतक का आधार कार्ड उपलब्ध नही होने पर आवेदक के आधार कार्ड के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया जा सकता है।
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार से मृत्य प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साईन करवायें।
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वह स्थान जहा पर मृत्यु होना घोषित होती है अगर स्थान निर्धारण ना हो पाये उस स्थिति में दाह/अन्तिम संस्कार वाले स्थान के रजिस्ट्रार द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा।
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गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में जहाँ उसकी मृत्यु की वास्तविक दिनांक व स्थान अनिश्चित होने पर बर्डन ऑफ प्रूफ प्रमाणों पर आधारित होगा। एसे प्रकरणों में दायर किये गये घोषणात्मक वाद में न्यायालय द्वारा निर्धारित दिनांक व स्थान पर निर्भर होता है।
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आवेदक द्वारा आवेदन फार्म में वर-वधु का नाम जन्म दिनांक माता पिता का नाम, वर-वधु का पता एवं विवाह की दिनांक आदि सूचनाएँ आवेदन फार्म में बिना किसी त्रुटि के भरी जानी चाहिए।
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आवेदक द्वारा आवेदन फार्म में वर-वधु का नाम जन्म दिनांक माता पिता का नाम, वर-वधु का पता एवं विवाह की दिनांक आदि सूचनाएँ आवेदन फार्म में बिना किसी त्रुटि के भरी जानी चाहिए।
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नही, विशेष विवाह अधिनियम के अर्न्तगत पंजीकृत विवाह का पंजीयन करवाना अनिवार्य नही है।
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सक्षम न्यायालय द्वारा विवाह विच्छेद की डिक्री होने पर एवं वर वधू में से किसी एक की मृत्यु होने कि स्थिति में पुर्नःविवाह का पंजीयन किया जा सकता है।
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हाँ, लिपिकीय त्रुटी होने पर विवाह पंजीयन अधिकारी को आवेदन के समय प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर जिला रजिस्ट्रार के अनुमोदन उपरांत संशोधन करवाया जा सकता है।
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हाँ, सम्बधित रजिस्ट्रार को पुराना प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर डिजिटली प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर विवाह प्रमाण पत्र पर ई-साइन करवायें।
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सम्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर विवाह प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साइन करवायें।
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हाँ, पहचान पोर्टल पर OTP के माध्यम से किया जा सकता है।
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एक बार विवाह पंजीयन होने पर न्यायालय के आदेश पर ही निरस्तीकरण की कार्यवाही होती है।
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वर या वधु में से किसी एक का राज्य से बाहर का निवासी होने पर भी राज्य में पंजीयन करवाया जा सकता हैं।
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हाँ, सभी धर्म समुदाय के लिए विवाह पंजीयन करवाया जाना जरूरी है।
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हाँ, राजस्थान का निवासी होने पर अनिवार्य है एवं राज्य के बाहर का होने पर जनआधार कार्ड की शिथिलता प्रदान की जाती है।
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हॉ, विवाह अधिनियम 2009 से पूर्व सम्पन्न विवाहो का रजिस्ट्रेशन भी इस अधिनियम में किया जा सकता है।
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नहीं, विवाह सम्पन्न होने के पश्चात कभी भी विवाह का पंजीयन करवाया जा सकता है।
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विवाह पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेजो सहित आवेदन सम्बन्धित रजिस्ट्रार कार्यालय में व पहचान पोर्टल पर ई-मित्र एवं आमजन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
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